
रायपुर। छत्तीसगढ़ में उग्रवाद प्रभावित इलाकों से एक अहम पहल सामने आई है। प्रतिबंधित संगठन के बीबीएम डिवीजन से जुड़े 15 उग्रवादियों ने हथियारों सहित आत्मसमर्पण की इच्छा जताई है। यह जानकारी राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा को भेजे गए एक पत्र के माध्यम से सामने आई।
बताया गया है कि यह पत्र पश्चिम सब-ब्यूरो सचिव विकास की ओर से जारी किया गया, जिसमें संगठन के सदस्यों ने मुख्यधारा में लौटने और सामान्य जीवन शुरू करने की इच्छा व्यक्त की है। पत्र में रेडियो संदेश के जरिए सुरक्षा की सार्वजनिक गारंटी देने का आग्रह भी किया गया है, ताकि आत्मसमर्पण की प्रक्रिया पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से पूरी हो सके।
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित आत्मसमर्पण में डिवीजनल और एरिया स्तर के सदस्य शामिल हैं। इनमें DVC-3, AC-5 और PM-7 श्रेणी के कुल 15 उग्रवादी बताए गए हैं, जो मुख्यतः बस्तर अंचल से जुड़े हैं। कुछ सदस्य पहले ही संपर्क में आ चुके हैं, जबकि अन्य के चरणबद्ध तरीके से पहुंचने की संभावना जताई गई है।
पत्र में आत्मसमर्पण में हो रही देरी के कारणों का भी उल्लेख है। इसमें केंद्रीय कमेटी के निर्णय की प्रतीक्षा, पुराने मामलों में फंसने की आशंका और चल रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान संभावित मुठभेड़ का डर प्रमुख बताया गया है। उग्रवादियों ने अपील की है कि निर्धारित अवधि तक कॉम्बिंग अभियान में ढील दी जाए, ताकि वे सुरक्षित स्थान तक पहुंच सकें। ओडिशा के सीमावर्ती जिलों में भी सर्च ऑपरेशन अस्थायी रूप से रोकने का अनुरोध किया गया है।
गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सरकार आत्मसमर्पण करने वाले सदस्यों को सुरक्षित मार्ग, विधिक सहायता और पुनर्वास योजनाओं का लाभ देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार जल्द ही एक आधिकारिक संदेश जारी करेगी, जिसमें आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति की जानकारी दी जाएगी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह आत्मसमर्पण तय समय पर संपन्न होता है तो यह राज्य में उग्रवाद विरोधी प्रयासों को नई दिशा दे सकता है। सरकार का कहना है कि हिंसा छोड़कर लौटने वालों के पुनर्वास और समाज में पुनर्स्थापन के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।





