हाईकोर्ट का सख्त रुख: सार्वजनिक स्थानों पर ध्वनि व लेज़र नियंत्रण को लेकर रिपोर्ट तलब,

बिलासपुर | छत्तीसगढ़ में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण और लेजर लाइटिंग के खतरों को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायाधीश विभु दत्त गुरु की डिवीजन बेंच ने सोमवार को सुनवाई के दौरान सरकार से स्पष्ट रोडमैप और कार्रवाई की समयसीमा मांगी।
ध्वनि प्रदूषण पर सवाल
जनहित याचिका में राज्य में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर चिंता जताई गई है। सुनवाई में महाधिवक्ता प्रफुल्ल एन भारत ने बताया कि Noise Pollution (Regulation and Control) Rules, 2000 के अनुरूप 1985 के कोलाहल नियंत्रण अधिनियम में संशोधन के लिए समिति बनाई गई है और समिति की बैठक पहले ही हो चुकी है। कोर्ट ने इस प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने का आदेश दिया।
लेजर लाइटिंग के स्वास्थ्य प्रभाव
हाईकोर्ट ने लेजर लाइटिंग के रेटिना और कॉर्निया पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर भी गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि याचिका में इस दावे के समर्थन में कोई वैज्ञानिक डेटा पेश नहीं किया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक अध्ययन और प्रमाण आधारित जानकारी प्रस्तुत करना आवश्यक है।
त्योहार और विवाह समारोह में उपयोग पर रोक की आवश्यकता
सुनवाई में यह भी सामने आया कि त्योहारों और विवाह समारोहों में डीजे साउंड सिस्टम के साथ लेजर लाइटिंग के इस्तेमाल पर अभी कोई ठोस नियम नहीं हैं। प्रमुख सचिव (गृह) के हलफनामे में भी इस तथ्य की पुष्टि हुई। अदालत ने निर्देश दिया कि सरकार प्रायोगिक शोध और संबंधित डेटा जल्द अदालत में पेश करे।
हाईकोर्ट का यह कदम ध्वनि और लेजर प्रदूषण पर नियंत्रण को प्रभावी बनाने और नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार को अब नियमावली बनाने और संशोधन प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने का दबाव बढ़ गया है।





