बस्तर में शांति की ओर बड़ा कदम: सुरक्षा कैंप अब बनेंगे स्कूल-अस्पताल के केंद्र

बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में बड़ी सफलता का दावा किया गया है। राज्य सरकार के अनुसार अब इस क्षेत्र का करीब 96 प्रतिशत इलाका नक्सली प्रभाव से मुक्त हो चुका है, जिससे यहां शांति और विकास की संभावनाएं तेजी से बढ़ी हैं।
सुरक्षा के लिए बने 400 से अधिक कैंप
गृह राज्य मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि पिछले दस वर्षों में दूरस्थ और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा मजबूत करने के लिए 400 से ज्यादा पुलिस और सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए। इनमें से करीब 120 कैंप पिछले दो वर्षों में ही बनाए गए, जिससे दुर्गम क्षेत्रों तक सुरक्षा बलों की पहुंच संभव हो सकी।
अब विकास की दिशा में बढ़ेंगे कदम
नक्सल गतिविधियों में कमी आने के बाद सरकार ने इन कैंपों के उपयोग को केवल सुरक्षा तक सीमित न रखने का फैसला किया है। योजना के तहत इन्हें स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं, प्रशासनिक सुविधाएं और सरकारी योजनाओं के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। कई स्थानों पर ये कैंप पहले ही एकीकृत विकास केंद्र के रूप में काम करने लगे हैं, जहां स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य जांच, राशन और अन्य योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में भी हालात बेहतर
अधिकारियों के अनुसार बस्तर के सीमावर्ती इलाकों में अब सिर्फ 35 से 40 माओवादी कैडर ही सक्रिय बचे हैं। नक्सल विरोधी अभियान में आधुनिक तकनीक और खुफिया सहयोग की भी बड़ी भूमिका रही है, जिसमें ISRO, NTRO, Indo-Tibetan Border Police और National Security Guard जैसी एजेंसियों का योगदान रहा है।
शीर्ष माओवादी कमांडर का आत्मसमर्पण
इसी बीच माओवादी संगठन के वरिष्ठ कमांडर पापा राव ने अपने साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। इसे सुरक्षा एजेंसियों ने नक्सल विरोधी अभियान की एक बड़ी उपलब्धि बताया है।
सरकार का कहना है कि पुनर्वास योजनाओं के माध्यम से आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है, ताकि बस्तर में स्थायी शांति और विकास का मार्ग मजबूत हो सके। आने वाले समय में पूरे क्षेत्र को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में अभियान जारी रहेगा।





