रायपुर। आज का बचपन तेजी से बदलती जीवनशैली के प्रभाव में है, जिसका सबसे बड़ा असर बच्चों के स्वास्थ्य पर देखने को मिल रहा है। घंटों मोबाइल और टीवी स्क्रीन पर समय बिताना, खेलकूद से दूरी और जंक फूड की बढ़ती आदतों के कारण बच्चों में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल शारीरिक समस्या नहीं, बल्कि भविष्य में गंभीर बीमारियों का संकेत भी है।कम उम्र में ही बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और थायरॉइड जैसी समस्याएं सामने आने लगी हैं। इसके साथ ही आत्मविश्वास में कमी और सामाजिक अलगाव जैसी मानसिक चुनौतियां भी बढ़ रही हैं।राज्य सरकार की पहल से मिल रहा समर्थनछत्तीसगढ़ में बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार लगातार पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रम चला रही है। इन अभियानों को गांव-गांव तक पहुंचाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है।महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा मातृ एवं शिशु पोषण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्थानीय खाद्य परंपराओं को बढ़ावा देने और संतुलित आहार की आदत विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।पारंपरिक भोजन को बताया गया समाधानविशेषज्ञों का मानना है कि रागी, बाजरा, ज्वार और कोदो-कुटकी जैसे पारंपरिक अनाज बच्चों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। ये न केवल पोषण प्रदान करते हैं, बल्कि शरीर को ऊर्जा और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी देते हैं। इनसे बने व्यंजन बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकते हैं।पहले 1000 दिन हैं बेहद महत्वपूर्णस्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार गर्भधारण से लेकर बच्चे के दो वर्ष तक का समय उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। इस अवधि में सही पोषण और सकारात्मक वातावरण बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास की मजबूत नींव रखते हैं।संतुलित आहार पर जोर“7 स्टार भोजन थाली” जैसी अवधारणाओं के माध्यम से संतुलित आहार को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें सभी जरूरी पोषक तत्व शामिल होते हैं। यह न केवल कुपोषण को रोकता है, बल्कि मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।जागरूकता ही है असली समाधानविशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए परिवार, स्कूल और समाज सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। जंक फूड की जगह पारंपरिक भोजन, स्क्रीन टाइम की जगह खेलकूद और लापरवाही की जगह जागरूकता अपनाना समय की जरूरत है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यदि आज आदतों में बदलाव किया जाए, तो आने वाली पीढ़ी अधिक स्वस्थ, सक्रिय और आत्मनिर्भर बन सकती है।Spread the lovePost navigationपर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने ‘श्री अग्रोहा पैलेस’ का किया भूमिपूजन