नक्सल मोर्चे पर बड़ी कामयाबी: 3 स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य समेत 22 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण

सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले और ओडिशा के मलकानगिरी क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान को मंगलवार को बड़ी सफलता मिली। उड़ीसा पुलिस महानिदेशक की मौजूदगी में 22 माओवादी कैडरों ने संगठन से अलग होकर सामूहिक आत्मसमर्पण किया। इस कदम से नक्सली संगठन को गंभीर झटका लगा है और सुरक्षा बलों की सफलता उजागर हुई है।
वरिष्ठ स्तर के नक्सली भी सरेंडर
आत्मसमर्पण करने वालों में तीन स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य, एक डिविजनल कमेटी मेंबर (DVCM) और छह एरिया कमेटी मेंबर (ACM) शामिल हैं। अधिकांश नक्सली केरलापाल एरिया कमेटी से जुड़े थे, वहीं दोरनापाल LOS का कमांडर भी सरेंडर करने वालों में शामिल है।
हथियारों के साथ सरेंडर
इस अवसर पर नक्सलियों ने सुरक्षा बलों को आधुनिक हथियार सौंपे, जिनमें एक AK-47 राइफल, दो इंसास राइफल और एक SLR सहित कुल 9 हथियार शामिल थे। विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्तर का सामूहिक आत्मसमर्पण संगठन की कमजोर होती पकड़ का संकेत है।
सरकार की आर्थिक सहायता
राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत हथियारों के साथ आत्मसमर्पण करने वाले 22 कैडरों को कुल 1 करोड़ 84 लाख 25 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। बैंक प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह राशि डिमांड ड्राफ्ट या चेक के माध्यम से प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, सभी आत्मसमर्पित कैडरों को तुरंत 25 हजार रुपये की आर्थिक मदद भी दी गई।
पुनर्वास और कल्याण योजनाएँ
सरकार की योजना के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए कई सुविधाएं मिलेंगी। इसमें आर्योदय गृह योजना के तहत आवास, विवाह सहायता के रूप में 25 हजार रुपये, अधिकतम 36 माह का कौशल विकास प्रशिक्षण और प्रशिक्षण अवधि के दौरान 10 हजार रुपये प्रतिमाह वजीफा शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आत्मसमर्पण न केवल सुरक्षा बलों की जीत है, बल्कि माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति और विकास की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।





