ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। मध्य पूर्व से कच्चे तेल की आपूर्ति में अनिश्चितता बढ़ने के बाद यूरोप और एशिया के कई देश वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं।

इस स्थिति में अमेरिका के तेल निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी कच्चे तेल का निर्यात ऐतिहासिक स्तरों के करीब पहुंच गया है, जिससे देश का आयात-निर्यात संतुलन तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा रुझान जारी रहा तो अमेरिका दशकों बाद एक बार फिर कच्चे तेल का शुद्ध निर्यातक बन सकता है। वर्तमान में अमेरिकी तेल निर्यात लगभग 5.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच चुका है, जो पिछले कई महीनों का उच्चतम स्तर है।

बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, वैश्विक तनाव के कारण सप्लाई चेन बाधित होने से एशिया और यूरोप के देशों को लंबी दूरी से तेल आयात करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। इसी वजह से अमेरिकी कच्चे तेल की मांग में तेज उछाल देखने को मिला है।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि कई नए अंतरराष्ट्रीय खरीदार अब अमेरिका से तेल खरीद रहे हैं, जिससे उसका निर्यात नेटवर्क पहले की तुलना में और व्यापक हो गया है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि अमेरिका की निर्यात क्षमता सीमित है और पाइपलाइन तथा लॉजिस्टिक्स से जुड़ी बाधाओं के कारण यह लगभग 6 मिलियन बैरल प्रतिदिन के आसपास ही रह सकती है।

कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति की दिशा बदल दी है, और इसका सबसे बड़ा लाभ फिलहाल अमेरिकी ऊर्जा उद्योग को मिलता नजर आ रहा है।

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By चतुर मूर्ति वर्मा, बलौदाबाजार

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