दुनिया में प्रभुत्व लौटाने का अमेरिका का नया कदम: चार जगहों पर बनाएगा मिलिट्री बेस

नई दिल्ली/वाशिंगटन : वैश्विक प्रभाव बनाए रखने और अपने सैन्य नेटवर्क को और मजबूत करने के उद्देश्य से अमेरिका एक नई रणनीतिक योजना पर काम कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, फिलहाल अमेरिका के पास दुनिया के 80 देशों में 750 से अधिक सैन्य ठिकाने हैं, जिनमें एयरबेस, नेवी बेस और आर्मी कैंप शामिल हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह संख्या वास्तविक आंकड़े से कहीं कम हो सकती है क्योंकि पेंटागन ने सभी डेटा कभी सार्वजनिक नहीं किया।
वर्तमान में अमेरिका के लगभग 13 लाख सैनिकों में से 1.72 लाख विदेशों में तैनात हैं। अब वाशिंगटन प्रशासन चार नए और अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों में अपने रणनीतिक मिलिट्री बेस स्थापित करने की तैयारी में है, जो उसके वैश्विक प्रभुत्व को और बढ़ा सकते हैं।
ये हैं वो चार जगहें जिन पर अमेरिका की नजर टिकी है —
- बगराम एयरबेस, अफगानिस्तान
अफगानिस्तान के परवान प्रांत में स्थित बगराम एयरबेस कभी सोवियत संघ का मुख्य ठिकाना था। 9/11 हमलों के बाद अमेरिका ने इसे अपने नियंत्रण में लिया, लेकिन 2021 में तालिबान की सत्ता वापसी के साथ इसे खाली करना पड़ा।
यह बेस दक्षिण एशिया, मध्य एशिया और पश्चिम एशिया के संगम बिंदु पर स्थित है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे ईरान, पाकिस्तान, चीन के शिनजियांग प्रांत और रूस की सीमाओं के बेहद करीब बनाती है। यहां 11 हजार फीट लंबे दो रनवे हैं, जो B-52 जैसे भारी बमवर्षक विमानों को संभाल सकते हैं।
- चाबहार-ग्वादर क्षेत्र, ईरान-पाकिस्तान सीमा
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ईरान के चाबहार बंदरगाह और पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के बीच किसी नए सैन्य अड्डे की संभावना तलाश रहा है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान के मकरान तट के पास पासनी क्षेत्र में अमेरिका अपना एयरबेस या नौसैनिक ठिकाना स्थापित कर सकता है।
यह इलाका ओमान की खाड़ी के नजदीक है और वैश्विक व्यापारिक समुद्री मार्गों के लिए अत्यधिक अहम माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम चीन के ग्वादर पोर्ट पर बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति का हिस्सा है।
- गाजा बॉर्डर, इजराइल
मध्य पूर्व में अपने प्रभाव को स्थिर रखने के लिए अमेरिका गाजा पट्टी की सीमा के पास एक नया मिलिट्री बेस बनाने की योजना बना रहा है। यह ठिकाना लगभग 10 हजार सैनिकों की क्षमता वाला होगा और इसकी लागत करीब 500 मिलियन डॉलर (4,000 करोड़ रुपये) बताई जा रही है।
इस बेस का उद्देश्य गाजा क्षेत्र में सीजफायर और स्थिरता की निगरानी करना होगा, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम ईरान पर रणनीतिक दबाव बनाए रखने का हिस्सा भी है।
- दमिश्क एयरबेस, सीरिया
अमेरिका reportedly सीरिया की राजधानी दमिश्क एयरबेस पर अपनी उपस्थिति बढ़ाने की तैयारी में है। इस बेस का उपयोग निगरानी, लॉजिस्टिक्स, रिफ्यूलिंग और मानवीय अभियानों के लिए किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, यह कदम इजराइल-सीरिया सुरक्षा समझौते की निगरानी को मजबूत करने की दिशा में है।
मध्य पूर्व में पहले से फैला विशाल अमेरिकी नेटवर्क
‘काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल मिडिल ईस्ट में 19 स्थानों पर करीब 40 से 50 हजार अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। अमेरिका पहले से ही बहरीन, मिस्र, इराक, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और यूएई में सक्रिय सैन्य ठिकानों का संचालन कर रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि ये नए बेस न केवल अमेरिका की सैन्य उपस्थिति को पुनर्संतुलित करेंगे, बल्कि आने वाले वर्षों में वैश्विक शक्ति समीकरणों को भी बदल सकते हैं।





