बिलासपुर: मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों को लेकर हाईकोर्ट ने पीड़ित पक्षों के हित में महत्वपूर्ण टिप्पणी और निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल आवेदन में देरी के आधार पर किसी भी क्लेम को प्रारंभिक चरण में खारिज नहीं किया जा सकता।

यह फैसला जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने सुनाया। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनियों की ओर से यह दलील दी गई थी कि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद ट्रिब्यूनल के पास ऐसे मामलों की सुनवाई का अधिकार नहीं रहता।

हालांकि हाईकोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि तकनीकी आधार पर पीड़ितों को न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि मोटर दुर्घटना जैसे मामलों में वास्तविक न्याय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि केवल प्रक्रिया संबंधी बाधाओं को।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल कानून के तहत सभी लंबित मामलों की सुनवाई जारी रखें। हालांकि, चूंकि संबंधित मुद्दा अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए अंतिम निर्णय आने तक ट्रिब्यूनल को अंतिम आदेश पारित करने से रोका गया है।

इस फैसले के बाद अब ट्रिब्यूनल स्तर पर पीड़ित परिवारों के दावों की सुनवाई उनके गुण-दोष के आधार पर आगे बढ़ सकेगी, जिससे हजारों प्रभावित परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।

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By चतुर मूर्ति वर्मा, बलौदाबाजार

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