आम आदमी पार्टी ने अपने पूर्व राज्यसभा सांसदों के हालिया राजनीतिक बदलाव को लेकर बड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय में याचिका दायर करने की तैयारी शुरू कर दी है, जिसमें इन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की जाएगी।पार्टी का कहना है कि जिन सांसदों ने हाल ही में किसी अन्य राजनीतिक दल का दामन थामा है, वह दलबदल विरोधी कानून के दायरे में आते हैं। इसी आधार पर उनकी अयोग्यता की मांग की जा रही है। आम आदमी पार्टी का तर्क है कि किसी भी सदस्य द्वारा व्यक्तिगत रूप से दल का ‘विलय’ नहीं किया जा सकता, इसलिए यह मामला स्पष्ट रूप से दलबदल से जुड़ा है।सूत्रों के मुताबिक, पार्टी संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई की मांग कर रही है और इस पूरे मामले को लेकर कानूनी विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। यदि राज्यसभा स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है, तो पार्टी अदालत का रुख भी कर सकती है।इन सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की संख्या में भी कमी आई है, जिससे संसद में उसकी ताकत प्रभावित हुई है।पार्टी प्रमुख ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे राजनीतिक विश्वासघात करार दिया है और आरोप लगाया है कि यह कदम पार्टी जनादेश के खिलाफ है।वहीं राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला कानूनी रूप से जटिल हो सकता है, क्योंकि दलबदल कानून में कई तकनीकी पहलू शामिल होते हैं। अंतिम निर्णय राज्यसभा के सभापति पर निर्भर करेगा, जो यह तय करेंगे कि यह मामला दलबदल की श्रेणी में आता है या वैध राजनीतिक बदलाव माना जाएगा।Spread the lovePost navigationजहां SIR में कटे ज्यादा वोट, वहीं हुआ बंपर मतदान: 95% के पार पहुंचा आंकड़ा