रायपुर : छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन ठगी के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है, लेकिन पीड़ितों को राहत मिलने की रफ्तार बेहद धीमी है। आंकड़ों पर नजर डालें तो साइबर क्राइम पोर्टल पर हजारों शिकायतें दर्ज होने के बावजूद बहुत कम मामलों में एफआईआर दर्ज हो पा रही है।

पुलिस व्यवस्था के तहत पीड़ित अपनी शिकायतें ऑनलाइन पोर्टल या 1930 हेल्पलाइन के माध्यम से दर्ज कराते हैं, जिसके बाद केस संबंधित थानों को भेजे जाते हैं। हालांकि, कई मामलों में शुरुआती जांच और बयान दर्ज करने के बाद भी केस आगे नहीं बढ़ पाते। नतीजतन, न तो आरोपियों तक पहुंच बन पाती है और न ही पीड़ितों की पूरी राशि वापस मिल पाती है।

राजधानी रायपुर की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। बीते साल साइबर ठगी के जरिए करोड़ों रुपये की ठगी हुई, लेकिन उसमें से केवल एक छोटा हिस्सा ही फ्रीज कराया जा सका। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई मोबाइल नंबर और बैंक खातों को ब्लॉक जरूर किया, लेकिन गिरोह के मुख्य संचालकों तक पहुंचना अब भी चुनौती बना हुआ है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित संसाधन, तकनीकी ढांचे की कमी और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी के चलते जांच प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। यही कारण है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हो पा रही, जिससे उनके हौसले लगातार बढ़ रहे हैं।

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By चतुर मूर्ति वर्मा, बलौदाबाजार

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