बिलासपुर। जिले में धान खरीदी की अवधि बढ़ाने का फैसला किसानों के लिए उम्मीद लेकर आया था, लेकिन यह राहत कागजों तक ही सिमट कर रह गई। अतिरिक्त दिनों में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया बेहद सुस्त रही, जिससे शासन की खरीदी नीति और व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।

दरअसल, जिले में धान खरीदी की नियमित प्रक्रिया 31 जनवरी को समाप्त हो गई थी। इसके बाद बड़ी संख्या में किसानों ने समय रहते धान नहीं बिक पाने की शिकायतें की थीं। किसानों के दबाव के बाद शासन ने 5 और 6 फरवरी को दो दिनों के लिए पुनः खरीदी की अनुमति दी, लेकिन इसका अपेक्षित लाभ किसानों को नहीं मिल पाया।

अतिरिक्त अवधि में खरीदी रही नाममात्र
बढ़ाई गई अवधि के पहले दिन केवल 82 किसानों ने टोकन प्राप्त किए, जिसके तहत करीब 516 मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई। वहीं दूसरे दिन 29 समितियों के जरिए महज 51 टोकन जारी किए गए और अनुमानित 285 मीट्रिक टन धान ही खरीदा जा सका। इस तरह दो दिनों में कुल खरीदी लगभग 801 मीट्रिक टन पर ही सिमट गई।

यह आंकड़ा इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि नियमित खरीदी के दौरान जिले में प्रतिदिन औसतन 15 से 20 हजार मीट्रिक टन धान की आवक होती थी। इसके मुकाबले अतिरिक्त अवधि की खरीदी नगण्य रही।

आंकड़ों ने खड़े किए सवाल
जिले में इस वर्ष कुल 1 लाख 32 हजार किसान पंजीकृत थे, जिनमें से करीब 1 लाख 24 हजार किसानों ने लगभग 6 लाख 75 हजार मीट्रिक टन धान बेचा। वहीं पिछले वर्ष यह आंकड़ा करीब 6 लाख 97 हजार मीट्रिक टन था। यानी इस साल लगभग 22 हजार मीट्रिक टन की गिरावट दर्ज की गई है।

कम खरीदी और धीमी प्रक्रिया ने टोकन व्यवस्था, नीति निर्माण और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि यदि व्यवस्थाएं बेहतर होतीं तो बढ़ी हुई अवधि वास्तव में राहत साबित हो सकती थी।

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By चतुर मूर्ति वर्मा, बलौदाबाजार

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