अखिलेश यादव का दावा: SIR के चलते उत्तर प्रदेश में करोड़ों वोटर हुए प्रभावित

उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इस अभियान के तहत राज्य की मतदाता सूची से 2.89 करोड़ नाम हटाए गए हैं। चुनाव आयोग की ओर से संशोधित ड्राफ्ट मतदाता सूची 31 दिसंबर को जारी की जाएगी, जबकि अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी 2026 को प्रकाशित होगी।
पुनरीक्षण से पहले प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 15 करोड़ 44 लाख थी। नाम हटने के बाद अब राज्य में लगभग 12 करोड़ 55 लाख मतदाता शेष रह जाएंगे।
किन कारणों से कटे इतने नाम
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, हटाए गए मतदाताओं में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जो स्थायी रूप से दूसरे स्थानों पर स्थानांतरित हो चुके हैं। करीब 1.25 करोड़ मतदाताओं ने खुद बीएलओ को इसकी जानकारी दी थी। इसके अलावा लगभग 45.95 लाख मतदाताओं के निधन की पुष्टि हुई है, 23.59 लाख नाम डुप्लीकेट पाए गए, 9.57 लाख लोगों ने जरूरी फॉर्म जमा नहीं किए और करीब 84 लाख मतदाता ऐसे हैं, जिनका कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिल पाया।
अखिलेश यादव का BJP पर हमला
SIR को लेकर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि SIR की पूरी प्रक्रिया भाजपा के लिए नुकसानदेह साबित हुई है। अखिलेश यादव के मुताबिक, इस कवायद का सबसे बड़ा असर भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक पर पड़ा है।
उन्होंने दावा किया कि SIR में हटाए गए नामों में से 85 से 90 फीसदी वोटर भाजपा समर्थक थे। अखिलेश यादव ने कहा कि अगर इस आंकड़े को विधानसभा सीटों के हिसाब से देखा जाए, तो भाजपा को हर सीट पर औसतन करीब 61 हजार वोटों का नुकसान होगा।
‘दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू पाएगी BJP’
सपा प्रमुख ने आगे कहा कि इस गणित के आधार पर भाजपा के लिए सरकार बनाना तो दूर, विधानसभा में दहाई का आंकड़ा पार करना भी मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा कि भाजपा की बनाई हुई रणनीति उसी के खिलाफ चली गई है।
दावा-आपत्ति का मिलेगा मौका
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद मतदाताओं को दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। यह प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 से 30 जनवरी 2026 तक चलेगी। इसके बाद सभी आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।





