रायपुर। छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY-Urban) के बीएलसी मोर जमीन मोर मकान के तहत धनराशि प्राप्त करने के बावजूद मकान नहीं बनाने वाले हितग्राहियों पर अब सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

शहरी प्रशासन (सूडा) ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन हितग्राहियों को वर्षों पूर्व किस्तों में राशि दी गई थी और जिन्होंने अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं किया है, उन पर पहले नोटिस जारी किया जाएगा, फिर भी यदि स्थिति में बदलाव नहीं हुआ तो प्रशासनिक कार्रवाई के तहत राशि वसूली और संपत्ति राजसात करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

क्या है मामला?

PM आवास योजना के BLC घटक के तहत हितग्राहियों को “मोर जमीन मोर मकान” मॉडल में किस्तों के माध्यम से आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि वे स्वयं के भूखण्ड पर मकान बना सकें। वर्ष 2018 से इस योजना के तहत राशि स्वीकृत की गई थी, लेकिन अब तक कई लाभार्थियों ने मकान निर्माण शुरू नहीं किया है।

सूत्रों के मुताबिक, बार-बार सूचना देने और नोटिस जारी करने के बावजूद इन हितग्राहियों ने न तो निर्माण कराया और न ही शासन से प्राप्त राशि को लौटाया है। कुछ निकायों में तो यह स्थिति काफी गंभीर हो गई है, जिससे अब सख्त कदम उठाने की योजना बनाई जा रही है।

 क्या होंगे प्रशासनिक कदम?

पहला नोटिस: मकान निर्माण नहीं करने वालों को संबंधित नगर पालिका/नगर निगम द्वारा नोटिस भेजा जाएगा।

अंतिम चेतावनी: अगर इसके बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं होता या राशि लौटाई नहीं जाती तो अंतिम नोटिस भेजा जाएगा।

संपत्ति जब्ती की कार्यवाही: अंतिम चेतावनी के बाद भी सुधार नहीं होने पर हितग्राहियों की संपत्ति राजसात (कुर्क) करने की कार्यवाही की जाएगी।

वसूली के लिए राजस्व प्रकरण: शासन से मिली राशि की राजस्व वसूली प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

PMAY 1.0 को पूरा करने की समय-सीमा

शहरी प्रशासन विभाग के अनुसार, पहले योजना के अंतर्गत मकानों को जुलाई 2025 तक पूर्ण करना था, लेकिन केंद्र सरकार ने अब इस योजना को दिसंबर 2025 तक वाइंडअप करने का निर्देश दिया है। इसका मतलब है कि हितग्राहियों को अब भी कुछ महीने का अवसर दिया गया है।

निकायों को निर्देश दिए गए हैं कि:

मकान अधूरे पड़े हों तो निर्माण शीघ्र पूरा करवाएं।

जो हितग्राही निष्क्रिय हैं, उनसे सख्ती से राशि वसूली की जाए।

स्थिति का आकलन

बड़ी संख्या में ऐसे हितग्राही हैं जिन्हें 5 साल पहले राशि मिली थी।

अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा लगातार संपर्क और प्रोत्साहन के बावजूद निर्माण नहीं हुआ।

इस लापरवाही से शासन की योजनाओं की सफलता और छवि दोनों प्रभावित हो रही हैं।

छत्तीसगढ़ में अब प्रधानमंत्री आवास योजना 1.0 के तहत धन लेकर मकान नहीं बनाने वालों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। शासन और निकाय अब इस मामले में सख्ती से पेश आने वाले हैं, ताकि वास्तविक जरूरतमंदों को समय पर लाभ मिल सके और योजनाओं की साख बनी रह सके।

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By चतुर मूर्ति वर्मा, बलौदाबाजार

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