जम्मू/श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के हीरानगर सेक्टर में सुरक्षा बलों ने एक बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। यह कार्रवाई हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद की जा रही है, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी। हमले के बाद पूरे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है और संवेदनशील इलाकों में सतर्कता बढ़ाई गई है।सूत्रों के अनुसार, सर्च ऑपरेशन उस समय शुरू किया गया जब एक स्थानीय महिला ने पुलिस को चार संदिग्ध लोगों के इलाके में देखे जाने की सूचना दी। इस जानकारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया और तुरंत जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) व स्थानीय पुलिस ने मिलकर क्षेत्र की घेराबंदी कर दी।सर्च ऑपरेशन में ड्रोन, स्निफर डॉग्स और थर्मल इमेजिंग डिवाइस का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) के पास स्थित है और पहले भी यहां घुसपैठ की कोशिशें हो चुकी हैं। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि संदिग्ध किसी बड़ी आतंकी साजिश को अंजाम देने की तैयारी में हो सकते हैं।इसी के साथ, पुलवामा जिले के करीमाबाद इलाके में भी तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। यह इलाका पहले भी आतंकियों की गतिविधियों का गढ़ रहा है और कई मुठभेड़ों का गवाह रह चुका है। फिलहाल पूरे क्षेत्र को सील कर दिया गया है और सघन जांच जारी है।पहलगाम हमले के बाद हालात की गंभीरता को देखते हुए थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी खुद जम्मू-कश्मीर पहुंच गए हैं। उन्होंने उधमपुर स्थित उत्तरी कमान मुख्यालय में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। सूत्रों के मुताबिक, उन्हें एलओसी के पुंछ-राजौरी सेक्टर और पीर पंजाल रेंज के दक्षिणी हिस्सों की मौजूदा स्थिति की विस्तृत जानकारी दी गई है।इस समय पूरा जम्मू-कश्मीर हाई अलर्ट पर है और सुरक्षा एजेंसियां संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। तलाशी अभियानों का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और हर स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद किया जा रहा है।Spread the lovePost navigationनई दिल्ली: नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रख्यात नेता और सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को शुक्रवार को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी आपराधिक मानहानि (डिफेमेशन) के एक मामले में कोर्ट द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट के आधार पर की गई। क्या है मामला? यह मामला वर्ष 2001 का है, जब दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने मेधा पाटकर के खिलाफ आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया था। उस समय सक्सेना अहमदाबाद स्थित एनजीओ ‘नेशनल काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज’ के प्रमुख थे। उनका आरोप था कि 25 नवंबर 2000 को मेधा पाटकर द्वारा जारी एक प्रेस नोट में उन्हें “कायर”, “देशविरोधी” और हवाला लेन-देन में शामिल” बताया गया था। साकेत कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल सिंह ने कहा कि पाटकर जानबूझकर अदालत में पेश नहीं हुईं और उन्होंने सजा से संबंधित आदेशों की अवहेलना की। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि चूंकि सजा पर कोई स्थगन आदेश (stay order) नहीं है, इसलिए आरोपी को बलपूर्वक कोर्ट में पेश कराने की आवश्यकता बन गई थी। इसी के आधार पर दिल्ली पुलिस आयुक्त के माध्यम से गैर-जमानती वारंट जारी किया गया और शुक्रवार सुबह मेधा पाटकर को गिरफ्तार किया गया। क्या थी सजा? पिछले वर्ष मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मेधा पाटकर को 5 महीने की सजा 10 लाख का जुर्माना सुनाया था। पाटकर ने इसके खिलाफ अदालत में अपील की थी, जिसके बाद उन्हें जमानत मिल गई थी और सजा को फिलहाल स्थगित कर दिया गया था। इस मामले की अगली सुनवाई 3 मई को निर्धारित की गई है, जिसमें कोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा। राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में, मंत्रालय का मीडिया चैनलों को निर्देश: रक्षा अभियानों और सुरक्षा बलों की आवाजाही का लाइव कवरेज न दिखाने की सलाह