नई दिल्ली: नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रख्यात नेता और सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को शुक्रवार को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी आपराधिक मानहानि (डिफेमेशन) के एक मामले में कोर्ट द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट के आधार पर की गई।क्या है मामला?यह मामला वर्ष 2001 का है, जब दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने मेधा पाटकर के खिलाफ आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया था। उस समय सक्सेना अहमदाबाद स्थित एनजीओ ‘नेशनल काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज’ के प्रमुख थे।उनका आरोप था कि 25 नवंबर 2000 को मेधा पाटकर द्वारा जारी एक प्रेस नोट में उन्हें “कायर”, “देशविरोधी” और हवाला लेन-देन में शामिल” बताया गया था।साकेत कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल सिंह ने कहा कि पाटकर जानबूझकर अदालत में पेश नहीं हुईं और उन्होंने सजा से संबंधित आदेशों की अवहेलना की।कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि चूंकि सजा पर कोई स्थगन आदेश (stay order) नहीं है, इसलिए आरोपी को बलपूर्वक कोर्ट में पेश कराने की आवश्यकता बन गई थी।इसी के आधार पर दिल्ली पुलिस आयुक्त के माध्यम से गैर-जमानती वारंट जारी किया गया और शुक्रवार सुबह मेधा पाटकर को गिरफ्तार किया गया।क्या थी सजा?पिछले वर्ष मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मेधा पाटकर को 5 महीने की सजा 10 लाख का जुर्माना सुनाया था।पाटकर ने इसके खिलाफ अदालत में अपील की थी, जिसके बाद उन्हें जमानत मिल गई थी और सजा को फिलहाल स्थगित कर दिया गया था।इस मामले की अगली सुनवाई 3 मई को निर्धारित की गई है, जिसमें कोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा।Spread the lovePost navigationपहलगाम आतंकी हमले पर केंद्र सरकार का बड़ा एक्शन: पाकिस्तान के खिलाफ पांच सख्त फैसले, भारत-पाक संबंधों में भारी बदलाव कठुआ के हीरानगर सेक्टर में सुरक्षा बलों का सर्च ऑपरेशन तेज, पहलगाम आतंकी हमले के बाद हाई अलर्ट