Kali Chaudas and Monthly Shivratri 2025 :कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि रविवार, 19 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 51 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद चतुर्दशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। इस बार चतुर्दशी तिथि पर काली चौदस, हनुमान पूजा और मासिक शिवरात्रि का विशेष योग बन रहा है। द्रिक पंचांग के अनुसार, रविवार के दिन सूर्य तुला राशि में और चंद्रमा कन्या राशि में रहेंगे। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:43 से दोपहर 12:29 बजे तक रहेगा।

काली चौदस: नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति का दिन

गरुड़ पुराण में वर्णित काली चौदस का संबंध यमराज को समर्पित दीपदान से जुड़ा है। यह पर्व मुख्यतः गुजरात में दीवाली उत्सव के दौरान मनाया जाता है। चतुर्दशी तिथि के मध्यरात्रि काल में मां काली और वीर वेताल की पूजा श्मशान में करने की परंपरा है।

यह दिन नरक चतुर्दशी या रूप चौदस से भिन्न होता है। इस दिन नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति पाने के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं।
भक्त एक पीले कपड़े में हल्दी, 11 गोमती चक्र, 11 कौड़ियां और चांदी का सिक्का रखकर ‘श्रीं लक्ष्मी नारायणाय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप कर तिजोरी में रखते हैं। ऐसा करने से धन लाभ और व्यवसाय में सफलता मिलती है।

मां काली को लौंग का जोड़ा अर्पित करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, जबकि चना-दाल और गुड़ का भोग शुभ माना जाता है। मां काली के बीज मंत्र —
‘ऊं क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा’
— का 108 बार जाप करने से शत्रु बाधा समाप्त होती है।

हनुमान पूजा: बुरी आत्माओं से रक्षा

इसी दिन हनुमान पूजा का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि दीपावली से एक दिन पहले हनुमान जी की पूजा करने से नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है और शक्ति व साहस की प्राप्ति होती है।
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान राम ने हनुमान जी को वरदान दिया था कि उनकी पूजा पहले की जाएगी, इसलिए दीपावली से पहले हनुमान पूजा की परंपरा चली आ रही है।
अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर में इस दिन हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है। भक्त इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं और उन्हें सिंदूर, चमेली का तेल और लाल फूल अर्पित करते हैं। हनुमान जी को लड्डू या गुड़-चने का भोग लगाना भी शुभ माना गया है।

मासिक शिवरात्रि: शिव और शक्ति के मिलन का पर्व

कार्तिक मास की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि भी मनाई जाएगी। यह पर्व भगवान शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे और ब्रह्मा व विष्णु ने उनकी पूजा की थी।
मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से कठिन कार्यों में सफलता, वैवाहिक सुख और मन की शांति प्राप्त होती है। यदि यह शिवरात्रि मंगलवार को पड़े, तो इसका शुभ फल कई गुना बढ़ जाता है।

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By चतुर मूर्ति वर्मा, बलौदाबाजार

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